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परिवार

कुछ वक्त के साथ हि परिवार से लड़के ऐसे छूट जाते है जैसे शाख से पत्ते  टूट जाते है

सच

दूर कोई मुझसे जाता नहीं पास मेरे कोई आता नहीं  मुलाकात करता मैं बहुतो से हूं ,पर मिल कर कोई मुझसे मुस्कराता नहीं बाते तो होती है सभी से ,मगर  दिल कोई किसी से लगाता नहीं सफर में मिलते हैं, बहुत से है लोग,पर  मिलकर कोई किसी को गले लगाता नहीं  दूर कोई मुझसे जाता नहीं पास मेरे कोई आता नहीं

मुस्कुराता

मुस्कुराता रहता हूं हर वक्त क्यो की मेरे गम का कोई गवाह नही है रोता तो मै भी गम मे पर  रोने के लिए मेरे पास कोई जगह नहीं है।                                           Ankur Gupta (Dhul)

आँसु

जिसे तुम बहते हुए आँसू समझते हो ओ तो किसी का बे-रंग खून बहता है यूं हि नही बहते आँसू , बहते है आँसू........... किसी अपने के रूठ जाने पर किसी अपने के दूर जाने पर  किसी कि याद आने पर  किसी का साथ छूट जाने पर 

teacher

कड़ियां कड़ियां जोड़  रहे है  मुझे सिखाने के लिए  मै उनके लिए क्या लिखूं जो मुझे सिखा रहे है कुछ कर जाने के लिए 

नखरे

इश्क मुकम्मल कैसे हो जब सभी को नखरे उठाने  वाले चहिए । कोई तो ऐसा हो जो कहे सके कि नखरे करने वाला चहिए। 

सिर्फ तुम

पैर तुम्हारे,उनमे पायल मेरी हो हाथ तुम्हारे,उनमे कंगन मेरे हो आगे बढते रहेंगे कदम हमारे सिर्फ तुम साथ हमारे हो