सफर by ankur
वो रास्ते का हमसफ़र था
वो रास्ते मे छूट गया।
कुछ तो खाशियत थी उसमे
जो मेरे मन को लूट गया।
जो मेरे साथ न चल सके
वो मेरे किस काम का।
जब उनकी मंजिल हि अलग है
वो मेरे काफिले मे किस काम का।
मिलते है इस जहां पर बहुत से लोग
पर वो नही मिला तो ये जहां किस काम का।
यूं हि सफर मे चलता रहूंगा
तुमको आवाज लगाता रहूंगा।
तुम मुझे मिलो या न मिलो
पर प्यार मै तुमसे करता रहूंगा।
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